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सखा पांडुरंगा...कवी दीपक तळवडेकर


सखा पांडुरंगा


विठूराया ठायी /माझा भक्तिभाव//  

घेतो त्याचे नाव/ हररोज// १// 


सखा पांडुरंग/ मला त्याचा ध्यास// 

मनी त्याचा वास / दरवळे// २// 


नाही कधी गेलो/ विठ्ठल दर्शना// 

तरी आस मना/ असे त्याची// ३//


जरी आहे  दूर/ मी तयापासून //

तरी विठूपण /काळजात // ४//


तूच माझा सखा/आता पांडुरंग//

लिहितो अभंग/ नित्य तुझा// ५//  


तुला विठुराया/नमन करतो/

नेहमी स्मरतो /आता तूज //६//


  सुखी व्हावा येथे/ सर्व शेतकरी/ दीन कष्टकरी/

हरदिनी//७// 


कवी दीपक दिगंबर तळवडेकर सिंधुदुर्ग ( स्वरचित अभंग)

मो. नं. 9405257372

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