सखा पांडुरंगा
विठूराया ठायी /माझा भक्तिभाव//
घेतो त्याचे नाव/ हररोज// १//
सखा पांडुरंग/ मला त्याचा ध्यास//
मनी त्याचा वास / दरवळे// २//
नाही कधी गेलो/ विठ्ठल दर्शना//
तरी आस मना/ असे त्याची// ३//
जरी आहे दूर/ मी तयापासून //
तरी विठूपण /काळजात // ४//
तूच माझा सखा/आता पांडुरंग//
लिहितो अभंग/ नित्य तुझा// ५//
तुला विठुराया/नमन करतो/
नेहमी स्मरतो /आता तूज //६//
सुखी व्हावा येथे/ सर्व शेतकरी/ दीन कष्टकरी/
हरदिनी//७//
कवी दीपक दिगंबर तळवडेकर सिंधुदुर्ग ( स्वरचित अभंग)
मो. नं. 9405257372